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आचार्य तुलसी समाधि स्थल

आचार्य तुलसी समाधि स्थल को अंतिम संस्कार स्थल के रूप में विकसित किया गया है। जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं। माला, जाप अध्यात्मिक साधना करते हुए यहां के कण-कण में वे उस महान आत्मा के उर्जा के विकिरणों के संचार की अनुभूति करते हैं। श्रद्धेय आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने इस परिसर का नामकरण “नैतिकता का शक्तिपीठ” दिया। निश्चित ही यहां आचार्य तुलसी द्वारा प्रदत नैतिक मूल्यों व उनके द्वारा प्रतिपादित आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्कारों का संप्रेषण होता है। परमपूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने इसे “तुलसी धाम” नाम दिया। यह धाम शताब्दियों व सहस्त्राब्दियों तक आचार्य तुलसी की अनुभूतियों को अजर-अमर रखेगा। यह समाधि स्थल उपासना एवं ध्यान साधना की उपयुक्त तपःस्थली है। शक्तिपीठ का भव्य व सूरम्य उद्यान भी बहुत आकर्षक है। बीकानेर जैसे मरुस्थल में छायादार विभिन्न वृक्षों व रंग-बिरंगे फूलों से रमणीय यह क्षेत्र मानसिक सुकून की अनुभूति करवाता है।

आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र

आचार्य तुलसी की पावन स्मृति में शान्ति प्रतिष्ठान के सहयोग से बीकानेर के सबसे बड़े जिला अस्पताल पीबीएम हाॅस्पिटल में मानव सेवा व समाज कल्याण का एक महान् उपक्रम आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र चल रहा हैं। जो केन्द्र सरकार द्वारा घोषित देश का 13वां रीजनल कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र है। उत्तरी भारत के सबसे बड़े इस कैंसर चिकित्सा केन्द्र के माध्यम से प्रतिवर्ष लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है। इस कैंसर सेन्टर में रोगियों की आचार्य तुलसी के प्रति आस्था से शारीरिक स्वास्थ्य लाभ के साथ ही जीवन मूूल्यों की प्रेरणा व प्रेक्षा ध्यान के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है। इस कैंसर सेन्टर में कोबाल्ट कक्ष, पेलिएटिव यूनिट, आचार्य महाप्रज्ञ बोन मैरो ट्रासप्लांट यूनिट आदि का निर्माण भी करवाया गया है। वर्तमान मे लगभग 3.50 करोड़ रूपये की लागत से नए सर्जिकल ओन्कोलाॅजी विभाग का निर्माण कार्य प्रगति पर है। सेंटर में ब्रेकीथैरेपी, कोबाल्ट रेडियोथैरेपी, लिनियर ऐक्सलरेटर, मेमोग्राफी, ब्रोंकोस्काॅपी आदि कैंसर की आधुनिक जांचों व चिकित्सा की व्यवस्थाऐं उपलब्ध है। सिर्फ राजस्थान ही नहीं पंजाब, हरियाणा व देश के अनेक राज्यों से लोग अपना इलाज करवाने बड़ी संख्या में इस सेंटर में आते हैं। गत वर्ष 2022 में कुल 1 लाख से अधिक रोगियों को चिकित्सा लाभ मिला है।

आचार्य महाप्रज्ञ बोन मैरो सेंटर

आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र, बीकानेर में परमपूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की स्मृति मे श्री हीरालाल जी मालू परिवार के सहयोग से आचार्य महाप्रज्ञ बोन मैरो सेंटर शुरू किया गया। यह सेंटर बोन मैरो कैंसर चिकित्सा के लिए क्षेत्र में अपना विशेष स्थान रखता है।

प्रेक्षा कॉटेज

आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र में चिकित्सा हेतु मरीजों एवं उनके परिजनों की आवश्यकता महसूस करते हुए सुविधाजनक कुल 30 साधारण एवं डीलाक्स प्रेक्षा काॅटेज का निर्माण करवाया गया है। जहां सभी आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था है।

आचार्य तुलसी चित्रदीर्घा

नैतिकता का शक्तिपीठ के पावन प्रांगण में आचार्य तुलसी समाधि स्थल के ऊपरी सतह पर एक भव्य एवं आकर्षक चित्रदीर्घा बनाई गई है। चित्रदीर्घा में आचार्य तुलसी के पूरे जीवन को हस्तनिर्मित चित्रों से प्रदर्शित किया गया है। चित्रदीर्घा -1 में गणमान्य चिन्तकों, साहित्यकारों व राजनैतिक व्यक्तियों के साथ एवं चित्रदीर्घा-2 में आचार्य तुलसी के आध्यात्मिक व्यक्तित्व से सम्बन्धित स्मृतियां चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित की गई है। तुलसी तुलसी धाम आने वाले श्रद्धालु जब इन चित्रों को देखते हैं तो आचार्य तुलसी की स्मृतियां जीवन्त हो जाती है। वर्तमान में चित्रदीर्घा के दोनों विशाल कमरों में नए फर्नीचर का निर्माण करवा कर सभी चित्रों को व्यवस्थित करवाया गया है। निश्चय ही यह चित्रदीर्घा दृष्टव्य है।

आचार्य तुलसी ग्रंथागार

चित्रदीर्घा के पास ही आचार्य तुलसी ग्रंथागार का विशाल हाॅल है। तेरापंथ के साथ ही जैन व जैनेत्तर धार्मिक व अन्य विषयों की लगभग 13000 पुस्तकों से ज्यादा सुसज्जित यह पुस्तकालय पाठकों एवं शोधकार्य के छात्रों के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

आचार्य तुलसी साहित्य केन्द्र

शक्तिपीठ परिसर में आचार्य तुलसी साहित्य केन्द्र बना हुआ है, जहां धर्मसंघ का साहित्य 40 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध है। समूचे बीकानेर चोखले का यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहां तेरापंथ धर्मसंघ से सम्बन्धित पुस्तक इतने कम मूल्य मे उपलब्ध है। वर्तमान में विभिन्न आगम एवं तुलसी वांगमय इस साहित्य केन्द्र को अत्यधिक समृद्ध बना रहे हैं। निकट भविष्य मे इस साहित्य केन्द्र की आधुनिकिकरण की परिकल्पना की गई है।

राजस्थानी भाषा साहित्य शोध संस्थान

परमपूज्य आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की प्रेरणा से प्रतिष्ठान में राजस्थानी भाषा साहित्य शोध संस्थान का गठन किया गया। राजस्थानी भाषा पर शोध एवं इस भाषा मे लिखे गए अनेकों पुस्तकों का प्रकाशन एवं उनके हिन्दी मे अनुवाद का कार्य संस्थान द्वारा किया जाता है। अब तक 25 से ज्यादा पुस्तकों का प्रकाशन संस्थान द्वारा हो चुका है। जिनमें श्रीमद् जयाचार्य रचित उपदेश रत्न कथाकोष के 7 अंक, कनक सुन्दरी, विनीत-अविनीत री चैपाई, अध्यात्म रा आगीवाण-आचार्य तुलसी, लोक रो उजास आदि अनेकों पुस्तकों का प्रकाशन उल्लेखनीय है।

आचार्य तुलसी उपासक साधना केन्द्र

परमपूज्य गुरुदेव तुलसी ने अपने जीवन में जो भी दिव्य स्वप्न देखे, उन्हें पूरा करके नया इतिहास रच दिया। इन स्वप्नों मे एक स्वप्न था - उपासक श्रेणी । पिछले 28 वर्षों में इस श्रेणी में लगभग 750 उपासक स्वयं साधना पथ पर आरूढ़ होकर व प्रशि़िक्षण प्राप्त करके समर्पण भाव से धर्मसंघ को अपनी आध्यात्मिक सेवाएं दे रहे है। परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की कृपा दृष्टि से शक्तिपीठ के इस प्रांगण में उपासक साधना केन्द्र की स्थापना की गई। इस केन्द्र में रहकर उपासक उपासिकाएं जप, तप, स्वाध्याय एवं ध्यान आदि प्रवृतियों से साधना के विकास पथ पर सतत गतिशील हैं। उपासकों के आवास व्यवस्था के लिए 6 नए आधुनिक केबिनों का निर्माण किया गया है। केबिन से संलग्न ही उपासकों के लिए हाॅल है, जहां निरंतर आध्यात्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं।

अतिथि भोजनालय

आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के प्रांगण में अतिथियों के लिए भोजनालय है। जहां नवकारसी, दोपहर एवं सायंकाल भोजन की व्यवस्था नियमित उपलब्ध रहती है। जमीकन्द रहित एवं पूर्ण सात्विक भोजन की व्यवस्था से उपासकों एवं बाहर से आने वाले अतिथियों को बहुत सुविधा रहती है। अतिथि भोजन के समय से दो घण्टे पहले कूमन लेकर भोजन प्राप्त कर सकते हैं।

आशीर्वाद भवन अतिथि गृह

प्रतिष्ठान द्वारा शक्तिपीठ के ठीक सामने आशीर्वाद भवन अतिथि गृह का निर्माण करवाया गया है। इस चार मंजिला भवन में कमरे, डाॅरमेट्री, सुसज्जित हाॅल, सत्कार पाकशाला, बेसमेंट में बने आॅडिटोरियम आदि सभी सुविधाजनक व्यवस्थाएं उपलब्ध है। भवन आध्यात्मिक सामाजिक आयोजनों एवं यात्रियों के ठहरने के लिए बहुत उपयोगी है। विवाह कार्यक्रमों के लिए क्षेत्र के सभी भवनों से अत्यन्त किफायती दरों मे यह भवन उपलब्ध करवाया जाता है। तेरापंथी परिवारों एवं जैन संस्कार विधि से किए गये विवाह के लिए विशेष छूट भी उपलब्ध है।

अणुव्रत मंच

आचार्य तुलसी समाधि स्थल से संलग्न अणुव्रत मंच है। जो आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के वृहद् आयोजनों के लिए बहुपयोगी है। यह विशाल ओपन थिएटर हृदय की विशालता व खुले विचारों की उदारता का परिचायक है। नैतिकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस मंच का सार्वजनिक उपयोग किया जाता है। शक्तिपीठ के प्रवेश द्वार से आचार्य तुलसी समाधि स्थल के रास्ते में हरे-भरे पुष्पित बगीचे के मध्य नैतिकता व अणुव्रत के संकल्पों सहित सेल्फी पाॅइन्ट के रूप में विकसित अणुव्रत संकल्प मंच बनाया गया है। जो यहां की स्मृतियों को श्रद्धालुओं व आगन्तुकों के मन-मस्तिष्क में सदा-सदा के लिए अंकित कर देने वाला है।

प्रेक्षाध्यान साधना केन्द्र

आचार्य तुलसी के अवदानों में व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नयन के महत्वपूर्ण अवदान प्रेक्षा ध्यान की साधना का क्रम समाधि स्थल परिसर में नियमित चलता है। इसके लिए अनुकूल संसाधनों की व्यवस्था की गई है। नीले रंग के प्रकाश से सरावोर प्रेक्षाध्यान कक्ष, ध्यान की गहराई में उतरने वालों के लिए एक नया अनुभव प्रदान करता है। पुर्ण रूप से वातानुकूलित यह प्रेक्षाध्यान कक्ष भविष्य में और अधिक विकास के स्वप्न संजो रहा है।

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आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान, नोखा रोड, गंगाशहर,बीकानेर, राजस्थान

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