50वें चयन दिवस

विदुषी, साहसी, निर्भीक सृजनकर्ता है साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा: साध्वीश्री  
असाधारण साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी के 50वें चयन दिवस पर हुआ कार्यक्रम आयोजित
गंगाशहर 09 फरवरी 2021।
तेरापंथ धर्म संघ की संघ महानिर्देशिका असाधारण साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा का 50वां चयन दिवस गंगाशहर स्थित शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। समारोह का शुभारम्भ साध्वीश्री रोहितयशाजी के द्वारा मंगल संगान से हुआ। समारोह को सान्निध्य प्रदान कर रही सेवा केन्द्र व्यवस्थापिका शासनश्री साध्वीश्री बसंतप्रभाजी ने कहा कि महान विभूतियां साधारण दिखते हुए भी असाधारण होते हैं। जो अनुशासन में रहते हैं वह अनेक संघर्षों पर विजय करते हैं वही महान बनते हैं। उन्होंने कहा कि जो स्वयं अनुशासन में रहता है वही व्यक्ति दूसरों पर अनुशासन कर सकता है। साध्वी प्रमुखा जी स्वयं अनुशासित रहती है।
साध्वीश्री प्रतिभाश्री जी ने कहा कि महान साहित्यकार एवं कवियत्री साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा में सेवा, संस्कार, समर्पण, जीवन में स्पष्टतया परिलक्षित होते हैं। उन्होंने कहा कि वो विदुषी, साहसी, निर्भीक सृजनकर्ता है। साध्वीश्री दीपमालाजी ने मुक्तक के द्वारा अपने विचार रखे। वहीं साध्वी शुक्लप्रभा जी ने अपने विचार रखते हुए उन्हें लोकप्रिय लेखिका व तत्वज्ञानी बताया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए जैन महासभा व आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी तेरापंथ धर्म संघ की मां है। इन्होंने तेरापंथ धर्म संघ को ऊंचाइयों तक पहंुचाने में तीन आचार्यों के सान्निध्य एवं निर्देशन में समर्पण एवं अनुशासनपूर्वक कार्य किया है। अपने जीवन के 8 दशक की यात्रा में 6 दशक से ज्यादा समय तेरापंथ धर्मसंघ को दिया है। छाजेड़ ने कहा कि उच्चतम स्तर की लेखिका होने के कारण ही आचार्य तुलसी वांग्मय की रचना करके 108 ग्रंथों का लोकार्पण अल्प समय में आचार्य महाप्रज्ञ के कर कमलों से करवाया।
तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्ष ममता रांका, कन्या मंडल तथा महिला मंडल की सदस्याओं ने सामूहिक सुमधुर गीत ’’मां की ममता है थ्हामे-असाधारण तेरापंथ की महाश्रमणी’’ से भाव भरी अभिवंदना व्यक्त की। साध्वीश्री विनीता प्रभा जी ने अपनी भांवाभिव्यक्ति कविता के माध्यम से व्यक्त की। साध्वी प्रभाश्री, साध्वीश्री कल्याणमित्रा, साध्वी गौरव प्रभा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा जी ने कोलकाता में जन्म लेकर दीक्षा केलवा में आचार्य तुलसी के कर कमलों से ग्रहण की तथा साध्वी प्रमुखा के पद पर मनोनयन गंगाशहर में हुआ। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा की चयन भूमि होने से गंगाशहर का तेरापंथ के इतिहास में विशेष स्थान बन गया है।
समारोह के दौरान ज्ञानशाला के नन्हे-नन्हे बच्चों द्वारा बहुत ही रोचक व शानदार लघु नाटिका महाश्रमणी कनकप्रभा जी के जन्म से लेकर चयन दिवस तक की यात्रा तक का आकर्षक मंचन किया। नाटिका का निर्देशन प्रेम बोथरा ने किया। गंगाशहर सेवा केन्द्र की साध्वियों द्वारा सामूहिक गीत से ममतामयी मां की अभिवंदना की। तेयुप मंत्री देवेन्द्र डागा, जय तुलसी फाउंडेशन के हंसराज डागा, तेरापंथ न्यास के जतन दूगड़, तेरापंथी सभा अध्यक्ष डॉ. पी.सी. तातेड़ ने भी अपने विचार रखे। साध्वी पुलकित प्रभा, साध्वी कान्ताश्रीजी ने अभिवंदना करते हुए साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी के स्वस्थ, सुदीर्घ एवं लोक कल्याणकारी जीवन की मंगलकामना की। समारोह का संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री अमरचंद सोनी ने किया।
उधर, बीकानेर में तेरापंथ धर्मसंघ की असाधारण साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी का 50वां मनोनयन दिवस डॉ. साध्वी परमयशा जी के सानिध्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सुमधुर मंगलाचरण के साथ हुई। साध्वीश्री कुमुदप्रभा जी ने गीतिका के द्वारा साध्वीश्री मल्लिका श्री जी ने कविता के माध्यम से तथा साध्वीश्री विनम्रयशा जी एवं मुक्ताप्रभा जी ने अपने वक्तव्य के द्वारा महाश्रमणी साध्वीप्रमुखा कनकपभा जी को अभिवंदना की। सभा के अध्यक्ष पदम बोथरा, पारसमल  छाजेड़ सुंदरलाल झाबक तथा महिला मंडल की अध्यक्ष शांता भूरा ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों ने ’’साध्वी प्रमुखा असाधारण क्यों?’’ इस प्रश्न को महाश्रमणी की विशेषताओं को उजागर करते हुए परिचर्चा के माध्यम से प्रस्तुत किया। डॉ. परमयशा जी ने उनके अनेक गुण सहिष्णुता, सहनशीलता, कर्मठता, समर्पण, सकारात्मक सोच, विनय, विवेक आदि को बताते हुए साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा जी का वात्सल्य और ममतामयी छाया सभी पर बनी रहने की मंगलकामना की।

प्रेषक
जैन लूणकरण छाजेड़
अध्यक्ष