जन्मोत्सव

अणुबम जहां विध्वंसकारी है वहां अणुव्रत जीवन विकासकारी: मुनिश्री शांतिकुमारजी
आचार्यश्री तुलसी का 107वां जन्मोत्सव आयोजित
गंगाशहर 16 नवम्बर 2020।
अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी का 107वां जन्मोत्सव नैतिकता का शक्तिपीठ पर भावांजलि के रूम में मनाया गया। कोरोना महामारी के चलते तेरापंथ भवन एवं शान्ति निकेतन में प्रवासरत चारित्रात्माओं ने अपने प्रवास स्थल पर ही आचार्य तुलसी का स्मरण करते हुए भावांजलि अर्पित की। 
शासनश्री मुनिश्री मणिलाल जी ने कंकर को शंकर बनाने वाले बिन्दु को सिंधू बनाने वाले उस महान आत्मज्योति को मुनिश्री भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गुरुदेव तुलसी के बारे में कुछ कहना या लिखना सूरज को दीपक दिखाना है। असीम को सीमा में बांधना अकथनीय पर शब्दों का जाल बिछाना मेरी समझ से बाहर है। उन्होंने कहा कि अनूपमेय को किसी उपमा से चर्चित करना पानी में शशि को पकड़ने जैसा है। 
मुनिश्री शान्ति कुमार जी ने कहा कि विश्व के महान संत आचार्यश्री तुलसी तेरापंथ धर्मसंघ के नवम् अधिशास्ता थे। उन्होंने धर्मसंघ को नई ऊचाईयां प्रदान की। प्रेक्षाध्यान, अणुव्रत और जीवन विज्ञान के माध्यम से उन्होंने जनमन के मानस को उद्धेलित ही नहीं अपितु स्वच्छ और संुदर बनाने का अहर्निश प्रयत्न किया। उन्होंने कहा कि नारी विकास के उन्नयन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। अणुबम जहां विध्वंसकारी है वहां अणुव्रत जीवन विकासकारी है। प्रर्दा प्रथा, रूढ़ि उन्मूलन आदि कितनी ही सामाजिक कुरूतियों को मिटाने का उन्होंने जी तोड़ प्रयास किया। मुनिश्री ने कहा कि भूतपूर्व राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन अपनी ‘‘पुस्तक लिविंग विद परपज’’ में विश्व के महान जीन 14 महापुरूषों का उल्लेख किया उनमें एक आचार्यश्री तुलसी भी थे। मुनिश्री ने कहा कि आचार्य तुलसी ने मेरे जैसे सैकड़ों व्यक्तियों को संयम रत्न प्रदान कर जीवन का उद्धार किया। आज उनकी 107वें जन्मोत्सव पर मैं उन्हें शत-शत नमन करता हूं।
शान्ति निकेतन सेवा केन्द्र में साध्वियों ने गीतिका के माध्यम से सामूहिक रूप से गुरुदेव तुलसी के जीवन को रेखांकित किया। शासनश्री साध्वीश्री बसंतप्रभाजी एवं साध्वीश्री प्रतिभा श्रीजी ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी ज्योतिपूंज, दिव्य दिवाकर मानवता के मसीहा थे। उन्होंने श्रमण परंपराओं को कई अभिनव अर्वाचीन आयाम दिए। नई शक्ति नये प्रयोग देकर तेरापंथ धर्मसंघ को नई ऊंचाइयां प्रदान की। साध्वीवृंद्ध ने कहा कि अध्यात्म को नया रूप देकर आधुनिक परिवेश में प्रस्तुत करना उनकी महत्वपूर्ण देन है। आचार्यश्री तुलसी करूणा पुरूष थे। हजारों-लाखों लोगों को प्रतिबोध देकर शांति व समता का मार्ग दिखाया। आचार्यश्री तुलसी के जन्मदिवस पर भावांजलि अर्पित की।
आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि आज हम आचार्यश्री तुलसी का 107वां जन्मदिन मना रहे है। आचार्यश्री ने पूरे देश में नैतिकता का संदेश दिया। जब देश आजाद हुआ तो उन्होंने कहा कि असली आजादी मिलनी चाहिए। उसका तात्पर्य था कि देश के नागरिक चरित्रवान और नैतिक बने। इसके लिए उन्होंने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। उस वक्त विश्व की मीडिया ने अणुव्रत की तुलना अणुबम से करते हुए लिखा कि जिस तरह से अणुबम विनाश में असरकारी होता है उसके विपरीत अणुव्रत विकास में उसी प्रकार से असरकारी है। आज कोविड महामारी के चलते हुए आचार्य तुलसी का बोधवाक्य निज पर शासन फिर अनुशासन की पूरे विश्व को आवश्यकता है। अगर हम इसकी पालना इमानदारी से कर लें तो कोविड को पैर पसारने की जगह नहीं मिलेगी। आचार्यश्री तुलसी ने असम्प्रदायिक धर्म का आगाज किया जिसके चलते अणुव्रत आंदोलन से किसी भी जाति, धर्म, रंग, उम्र का व्यक्ति उसका सदस्य बन सकता है। आचार्यश्री तुलसी के कुछ बोधवाक्य इतने असरकारी है कि अगर व्यक्ति जीवन में लागू कर ले तो उनका जीवन सफल हो सकता है जैसे समस्याओं से घबराओ मत, समस्याओं का सामना करो, समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जो व्यवहार आपको पसंद नहीं वो व्यवहार आप दूसरों के साथ न करें। छाजेड़ ने सभी से आह्वान किया कि आचार्यश्री तुलसी वांग्मय का स्वाध्याय करना चाहिए जिससे हम उनके विचारों और संदेशों को जन-जन तक पहंुचाने में सफल होंगे। 
नैतिकता के शक्तिपीठ पर अभातेयुप के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पीयूष लूणिया ने कहा कि आचार्य तुलसी ने युवकों की शक्ति की महत्ता को समझते हुए उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर तेरापंथ युवक परिषद की स्थापना की। आज पूरे देशभर में लगभग 500 के आस-पास उनकी शाखाएं है। यह समाज को बहुत बड़ा अवदान दिया। अब तेरापंथ धर्मसंघ के जितने भी आयाम है उनको जन-जन तक पहंुचाने का काम अभातेयुप करती है। तेरापंथ सभा के मंत्री एवं आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के ट्रस्टी ने कहा कि गुरुदेव ने संस्कार निर्माण का कार्य शुरू किया उस वक्त समाज में छूआछूत का बहुत बोलबाला था। अस्पृश्यता निवारण के लिए संस्कार निर्माण समिति के माध्यम से गांव-गांव, ढाणी-ढाणी उन्होंने यह संदेश दिया कि समाज के सभी वर्ग एक समान है। आचार्यश्री तुलसी ने धर्म स्थानों में हरिजनों के प्रवेश खोला तथा उन्होंने समान स्तर की मान्यता प्रदान की। उनके कार्यों से प्रभावित होकर तत्कालीन गृहमंत्री जगजीवन राम बीकानेर आए और आचार्यश्री तुलसी के छूआछूत मिटाओ अभियान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। सोनी ने कहा कि गुरुदेव तुलसी की खास बात थी कि वे अपने प्रत्येक आयाम और कार्यों का श्रेय पूर्ववर्ती आचार्यों की कृपा तथा सहयोगी संतों के श्रम को देते थे। ज्ञानशाला के संयोजक रतन छलाणी ने कहा कि आचार्य तुलसी ने साहित्य का विपुल भंडार भरा। आगम संपादन का कार्य करके एक ऐतिहासिक कार्य किया। प्रेक्षाध्यान, जीवन-विज्ञान और अणुव्रत के साहित्य सृजन से लोगों को जीवन निर्माण की दिशा मिली। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने ऐसा कोई क्षेत्र में छोड़ा जिसमें उन्होंने कार्य नहीं किया हो। साधु-साध्वियों की शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े, नारी शिक्षा एवं विकास एवं कई संगठनों की स्थापना की। गुरुदेव का सबसे बड़ा उपक्रम ज्ञानशाला संचालन का था। आचार्यश्री तुलसी कहते थे कि अगर आप बुढ़ापा अच्छा चाहते है तो बच्चों को ज्ञानशाला में अवश्य भेजे। ज्ञानशाला संस्कार निर्माण की बड़ी फैक्ट्री है। इस अवसर पर रतन छलाणी ने संकल्प लिया कि वो यह प्रयास करेंगे कि गंगाशहर के प्रत्येक घर से बच्चे ज्ञानशाला में अवश्य पहंुचे। 
तेयुप मंत्री देवेन्द्र डागा ने तेयुप एवं किशोर मंडल की तरफ से गुरुदेव तुलसी को भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वो पहले ऐसे धर्मगुरु थे जिन्होंने नीव को मजबूत करने का प्रयास किया अर्थात किशोरों को धर्म से जोड़ने के लिए किशोर मंडल की स्थापना की। मुख्यवक्ता अनिल सेठिया ने कहा कि वर्तमान महामारी के इस समय में आचार्यश्री तुलसी का मंत्र निज पर शासन फिर अनुशासन सबसे ज्यादा प्रसांगिक है। हमें सरकारी की गाईड लाईन की पालना करते हुए अपने आपको अनुशासित  रखने की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में युवकों को व्यसन मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। 
समारोह का शुभारम्भ बीकानेर के गायक निर्मल बैद ने गीतिका का संगान किया। समारोह का सफल संचालन ट्रस्टी जतनलाल संचेती ने किया। आभार ज्ञापित कन्हैयालाल रामपुरिया ने किया।