रंग संवाद

बीकानेर थियेटर फेस्टिवल में आचार्य तुलसी समाधि स्थल पर हुआ रंग संवाद
बीकानेर।
आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान, अनुराग कला केंद्र, विरासत संवर्धन संस्थान, उत्तर पश्चिम रेलवे साहित्य संस्कृति एवं ललित कला संस्थान, बीकानेर मंडल, होटल मिलेनियम के संयुक्त तत्वावधान में बीकानेर में 4 से 8 मार्च तक आयोजित हो रहे बीकानेर थिएटर फेस्टिवल 2020 के दूसरे दिन आशीर्वाद में चित्तौड़गढ़ के लोक नाटक ‘‘तुर्रा कलंगी’’ का मंचन किया गया। 
           फेस्टिवल के संयोजक सुधेश व्यास के अनुसार नारायण शर्मा द्वारा निर्देशित इस नाटक का बीकानेर में पहली बार मंचन हुआ है। इस नाटक को देखने वाले आश्चर्यचकित रह गए। सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। फेस्टिवल के समन्वयक विजयसिंह राठौड़ के अनुसार जयपुर की प्रस्तुति का मंचन भैंवर्या कालेट रेलवे अॉडिटोरियम में सिकंदर खान के निर्देशन में हुआ। बीकानेर की प्रस्तुति ‘‘लहरों के राजहंस’’ अशोक जोशी के निर्देशन में टाऊन हाल में हुई। रविंद्र रंगमंच पर हेमा सिंह, बरेली के निर्देशन में ‘‘चैनपुर की दास्तान’’ नाटक का मंचन किया गया। मुंबई की टीम द्वारा ‘‘शाकुंतलम’’ नाटक टी एम अॉडिटोरियम में रूपेश टिल्लू के निर्देशन में हुआ। 
               इससे पूर्व सुबह 8 बजे आचार्य तुलसी समाधि स्थल नैतिकता का शक्तिपीठ परिसर में रंग संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें रंगमंच, कलाकर्म, जन भावना-जन जुड़ाव। चुनौतियां और समाधान। सरकारों का कलाधर्म के प्रति रवैया। समय के साथ नाट्य परम्परा में आया बदलाव। बदलाव से उपजी परिस्थितियां। कला रसिक समाज। समाज के दायित्व। सरकारों के संरक्षण में अकादमियों की स्थिति। रंग-शख्यितों के अनुभव। रंगकर्मियों-कलाधर्मियों, श्रोताओं की जिज्ञासाएं। कलाधर्म को संवेदनात्मक सत्याग्रह बताते हुए गुरुवार को हुए रंग-संवाद में इन्हीं विचारों-बातों का मंथन हुआ। बीकानेर थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन गंगाशहर स्थित नैतिकता का शक्तिपीठ परिसर में नाटककार-चिंतक डाॅ. नंदकिशोर आचार्य और भानू भारती के आतिथ्य व साबिर हुसैन के संयोजन में रंग-संवाद आयोजित हुआ। इस मौके पर रंग-शख्सियतों ने अपने रंग धर्म अनुभवों के विचार साझा किए। चुनौतियों के समाधान पर मंथन किया। कला और नाट्य परम्परा के विविध आयामों के पक्षों को सामने रखा। श्रोताओं के जिज्ञासाओं भरे सवालों के जवाब भी दिए। 
             डाॅ. नंद किशोर आचार्य ने कहा कि कला रसिक समाज अपने मनुष्यत्व में झांकना चाहता है इसलिए वह सत्ता का विरोध करता है। कलाकार कभी सत्ता का मुखापेक्षी नहीं हो सकता। सरकार के संरक्षण में कला और कला-साहित्य से जुड़ी अकादमियों की स्थिति और कार्यप्रणाली पर बाते रखते हुए बताया हम औपचारिक लोकतंत्र में जी रहे हैं। सरकार के संरक्षण में अकादमियां कभी लोकतांत्रिक नहीं रह सकती। हर युग का सत्य यही है कि सत्ता को स्वतंत्र विचारों से डर लगता रहा है। रंगकर्म में स्क्रीप्ट की कमी को सिरे से नकारते हुए डाॅ. आचार्य ने कहा कि जयदेव तनेजा की एक कृति में 300 नाटकों की सूची है। पर हो यह रहा है हम केवल दिल्ली और बडे़ शहरों मे हो रहे नाटकों को ही करने की प्रवृत्ति को अपना रहे है। हम अच्छी स्क्रीप्ट तक पहंुच ही नहीं रहे। उत्कृष्ट कृतियों को तलाशने की मानसिकता जाग्रत हो। समय की मानसिकता और समकालीनता को समझकरउसे नाटक मे व्यक्त करने पर कार्य करना जरूरी है। रंग-संवाद के दौरान रंगकर्मी भानू भारती ने बताया कि नाटक में जीवंत संवाद ना हो तो नाटक निरर्थक होता है। संवाद का संयोजन रंगकर्मी साबिर हुसैन ने किया। इस मौके पर अनेक रंगकर्मी और कलाधर्मी मौजूद थे। इसके पश्चात आशीर्वाद भवन में तुर्रा-कलंगी नाटक का मंचन किया गया जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। 
            फेस्टिवल के क्यूरेटर सुनील जोशी ने बताया कि गुरुवार को फेस्टिवल की शुरुआत प्रातः आठ बजे हुई। आचार्य तुलसी समाधि स्थल पर आयोजित नाट्य कार्यशाला में गोवा के सीनियर नाट्यकर्मी विजय नायक ने नाट्य कला के विविध आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। दो घंटे चली इस वर्कशाप का संचालन हरीश बी शर्मा ने किया। इस कार्यशाला में देश के तीस रंगकर्मी सम्मिलित हुए।  फेस्टिवल के मीडिया कॉआर्डिनेटर गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि सुबह दस बजे आशीर्वाद भवन में रंग संवाद का आयोजन किया गया। भानू भारती और डॉ नंदकिशोर आचार्य जैसे राष्ट्रीय रंग शख्सियतों की सन्निधि में आहूत इस रंग संवाद का संयोजन जोधपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी सुधीर हुसैन द्वारा किया गया। खैरीवाल ने बताया कि सिने तारिका हेमामालिनी की डुप्लीकेट के रूप में मशहूर फिल्म और टीवी जगत की मशहूर अदाकारा सीमा मोटवानी आज फेस्टिवल के नाटक देखने के लिए बीकानेर पहुंच गई हैं।