दिल को कैसे रखें सेहतमंद

संयमित जीवन जीने से हार्ट अटैक से बचा जा सकता है: डॉ. छाजेड़
‘‘दिल को कैसे रखें सेहतमंद’’ विषय में संगोष्ठी आयोजित
गंगाशहर।
आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के तत्वावधान में ‘‘दिल को कैसे रखें सेहतमंद’’ विषय पर गगाशहर स्थित तेरापंथ भवन में संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. बिमल छाजेड़ ने कहा कि मेडिकल साइंस में बीमारी को जड़ से खत्म करने की कोई दवाई नहीं है इसी कारण से आज पूरे विश्व में बीमारी का फैलाव हो रहा है। आज ताजमहल के बारे में किसी से भी पूछ लो काई भी बता देगा लेकिन हार्ट अटैक की बीमारी की जड़ क्या है किसी को नहीं पता। उन्होंने कहा कि आज के इस भाग-दौड़ व दिखावे के कारण आदमी असंयमित जीवन जी रहा है। हर कोई आज गलत-सलत खा रहा है और गलत तरीके से जीवन को व्यतीत कर रहा है। सोने के समय खाना और खाने के समय सोना ही आजकल की फैशन हो गई है। उन्होंने कहा कि आज पूरे भारत में हार्ट-अटैक की बीमारी का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसका महत्वपूर्ण कारण ही असयंमित जीवन है। इस बीमारी के बारे में सही जानकारी देने वाला कोई नहीं है। इस लिए इस बीमारी के बारे में सरल और विस्तारपूर्वक जानकारी देने के लिए मैंने एक मिशन छोड़ है। हर दिन यूटूब पर एक लाख से ज्यादा लोग मेरे द्वारा इस बीमारी से बचने के उपाय पर दी गई जानकारी को सुनते हैं। डॉ. छाजेड़ ने कहा कि हार्ट अटैक का इलाज बाईपास सजर्री नहीं है और ना ही कोई दवाई है। इसके बचने का केवल मात्र खान-पान पर संयम रखना ही ईलाज है। आज हमारे अंदर केवल यही धारण है कि मेडिकल साइंस सही है। जो दवाई डॉक्टर ने दी है केवल उसी से सही हो सकता है। लेकिन यह धारणा गलत है। हमारे शरीर में सभी बीमारियों को दूर करने की ताकत है। बस हमें उसे पहचानना होगा। किताबों में लिखी सब पढ़ रहे हैं लेकिन इसके अलावा भी जीवन है इसे कोई नहीं सीख रहा है। केवल दवाई देकर बीमारी को रोक रहे है ना की उसकी जड़ को ही खत्म कर दें। उन्होंने कहा कि सभी बीमारियों में समय के अनुसार दवाइयां दी जाती है लेकिन हार्ट अटैक में पूरे जीवन भर के लिए दवाइयां लेनी पड़ती है। लेकिन अगर हर व्यक्ति संयमित जीवन और खान-पान के साथ उचित व्यायाम करें तो हार्ट अटैक जैसी भयावह बीमारी से बचा जा सकता है।
डॉ. बिमल छाजेड़ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक मरीज ने मेरी पूरी जिंदगी को बदल डाला। उसका मेडिकल सांइस में जो सीखा उसी अनुसार इलाज करते हुए भी उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु क्यों हुई इसके बारे में जब गहल चिंतन और शोध किया तो पता चला कि मैंने केवल दवाई दी लेकिन वो क्या खा रहा है, व्यायाम कर रहा है या नहीं इसकी जानकारी नहीं दी। केवल दवाई से बीमारी का इलाज संभव नहीं है। इसी को लक्ष्य बनाते हुए 1995 में ‘साओल’ नाम से एक संस्था बनाई जिसमें लोगों को हार्ट अटैक से बचाने के बारे में बताते हैं। इस संस्था से आज तक लगातार करीब 2.50 लाख लोगों को इस भयावह बीमारी से छूटकारा दिला सके हैं। प्रोजेक्टर के माध्यम से उन्होंने उपस्थित लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि हार्ट अटैक के मरीज को सिर्फ दवा मत दो उसे दवा के साथ उचित मार्गदर्शन भी मिलना चाहिए। अगर व्यक्ति संयमित जीवन जीने और उचित व्यायाम करे तो उसे कभी हार्ट अटैक हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक के मरीज को दवा के साथ योग भी करना चाहिए। दिल्ली में आध्यात्मक साधना केन्द्र में आमजन को दवाई के साथ व्यायाम और योग करवाए जाते है जिससे हार्ट अटैक के मरीज को जल्द और सही इलाज मिल सके। डॉ. छाजेड़ ने कहा कि हार्ट पूरे शरीर को ब्लड देने का कार्य करता है। बदले में तीन ट्यूब लेता है। वो ट्यूब 70 प्रतिशत ब्लॉक हो जाए तभी हार्ट की बीमारी होती है। और इस 70 प्रतिशत को रोकने के लिए हमें संयमित जीवन जीएं व कॉलेस्ट्रॉल को शरीर में बढ़ने से रोकेंगे तभी हार्ट अटैक की बीमारी से छूटकारा पा सकेंगे।
कार्यक्रम की शुरूआत मुनिश्री शान्ति कुमारजी के द्वारा नमस्कार महामंत्र के साथ हुई। मुख्य वक्ता डॉ. बिमल छाजेड़, डॉ. अर्जुन सिंह चौहान, श्रीमती मधु चौहान, सुनील कसवाँ का पूर्व महापौर नारायण चौपड़ा, जैन लूणकरण छाजेड़, अरमचन्द सोनी, जतन संचेती, तेरापंथ महिला मण्डल बीकानेर की शान्ता भूरा ने जैन पताका, माला व स्मृति चिंह देकर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया।