राष्ट्र उत्थान

आचार्य महाप्रज्ञ के संदेशों से पूरा विश्व हो रहा लाभांवित: डाॅ. मेघना शर्मा
आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर ‘राष्ट्र उत्थान और आचार्य श्री महाप्रज्ञ‘ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
गंगाशहर। आचार्य महाप्रज्ञ जी को कभी आवेश में नहीं आये। महाकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने आचार्य महाप्रज्ञ को भारत का दूसरा विवेकानन्द की उपाधि दी थी। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने आगमों को जनभाषा में उपलब्ध करवाया जिससे आज आम आदमी को पढ़ने के लिए सुगम हो रहे हैं। यह विचार आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर ‘‘राष्ट्र उत्थान व आचार्य महाप्रज्ञ’’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता महिला अध्ययन केन्द्र एमजीएसयू की निदेशक डाॅ. मेघना शर्मा ने रखे। उन्होंने कहा कि कोई भी संदेश संगोष्ठियों के माध्यम से जन-जन तक सरलता से पहुंचाया जा सकता है। आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान गुरुदेव के सिद्धान्तों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भागीरथी प्रयास कर रहा है। आचार्य महाप्रज्ञ जी और अब्दुल कलाम ने एक साथ एक पुस्तक लिखकर विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रेम-भाईचारा, सद्भावना, अहिंसा, समन्वय, नैतिकता, राष्ट्र उत्थान, चरित्र-शिक्षा सभी क्षेत्रों में आचार्य महाप्रज्ञ जी ने बहुत उंमदा कार्य किया है। आचार्य महाप्रज्ञ जी के संदेशों से आज भारत ही नहीं अपितु पूरा विश्व लाभान्वित हो रहा है। वो वास्तव में विश्व संत थे। उन्होंने विश्व उत्थान हेतु कार्य किये।
महापौर सुशीला कंवर ने कहा कि आचार्य तुलसी ने 8 दशक तक धर्म-अध्यात्म के माध्यम से जन-जन को नैतिकता का पाठ पढ़ाया तथा चारित्र उत्थान के लिए प्रेरित किया एवं महिला उत्थान व सशक्तिकरण का बीड़ा उठाया।
आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि प्रकृति उनके अनुकूल हो जाती है जो समय के पाबंद होते हैं। तेरापंथ के आचार्य समय के पाबंद होते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में जब साम्प्रदायिक दंगे हुए उस वक्त आचार्य महाप्रज्ञ ने ‘‘अहिंसा यात्रा’’ करके शान्ति स्थापना का संदेश दिया। छाजेड़ ने कहा कि राष्ट्र के उत्थान के लिए आचार्य तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञ जी ने अद्भुत कार्य किया। महाप्रज्ञ जी की अहिंसा यात्रा से प्रभावित होकर पाकिस्तान के एक मुस्लिम नेता ने उन्हें पाकिस्तान पधारने का आमंत्रण दिया था। छाजेड़ ने चारित्रात्माओं, मुख्य वक्ता डाॅ. मेघना शर्मा एवं मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर व उपमहापौर राजेन्द्र पंवार का स्वागत किया।

मुनिश्री शान्तिकुमार जी ने कहा कि आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जी ने विश्व को शान्ति और सद्भावना का संदेश दिया। गुरुदेव तुलसी ने दक्षिण में हिन्दी के विरोध को प्रेम की भाषा से शमन किया। प्रेम की भाषा सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। गुरु के प्रति समर्पण आचार्य महाप्रज्ञ में अद्वितीय था। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन-वैज्ञानिक दर्शन है। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने राष्ट्र उत्थान के लिए बहुत कार्य किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के अणुव्रत के सिद्धान्त भी वैज्ञानिक धर्म ही है। इस अणुव्रत के सिद्धान्तों को अपने जीवन में समायोजित करने से सम्पूर्ण जीवन आध्यात्म और सद्भावना पूर्ण व्यतीत होता है। 
मुनिश्री मणिलाल जी ने कहा कि जीवन में शान्ति, समन्वय, संयम, अहिंसा, समता है, संयम है, सत्य है, अहिंसा, वैराग्य, प्रेम है तभी जीवन में शान्ति होती है। समता जीवन का श्रृंगार होता है। मुनिश्री गीतिका के माध्यम से जीवन में सद्भावना तथा नैतिकता के लिए प्रेरित किया। नगर निगम के उपस्थित महापौर, उपमहापौर व पार्षदों से कहा कि जीवन में समता का विकास करें, शहर का विकास हो जाएगा।
मुनिश्री कुशलकुमार जी ने कहा कि ‘राष्ट्र उत्थान और धर्म’ में से राष्ट्र पहले और धर्म बाद में होता है क्योंकि अगर राष्ट्र ही सुरक्षित नहीं रहा तो धर्म की पालना कैसे होगी। मुनिश्री ने गिलास और पानी का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र उत्थान कैसे हो। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत अभियान शुरू किया। आचार्य तुलसी ने समय-समय पर नेताओं का मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रपति भवन से लेकर गांव-गांव की झोपड़ियों तक अणुव्रत का संदेश दिया जिससे देश में नैतिकता और आध्यात्मिकता की अलख जगाई। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने अणुव्रत के माध्यम से अहिंसा यात्रा के द्वारा शान्ति का संदेश देकर देश में शान्ति का माहौल तैयार किया। मुनिश्री ने भगवान राम और राजा भरत के उदाहरण के माध्यम से राज-देश चलाने की बात कही। मुनिश्री ने कहा कि राजनीति में आने वालों का मुख्य उद्देश्य है कि अपने क्षेत्र का कैसे विकास करे। बदलाव की दिशा में हमारे कदम आगे बढे़़। नैतिकता के शक्तिपीठ से नैतिकता का संदेश लेकर जाये और जीवन व्यवहार में धारण करें।
विदेश यात्रा से पधारे साधक अश्विनी ने कहा कि राष्ट्र उत्थान के लिए आचार्य महाप्रज्ञ जी का दर्शन आज भी मार्गदर्शित कर रहा है। आचार्य महाप्रज्ञ प्रज्ञावान पुरुष थे। आचार्य महाप्रज्ञ जी ने कहा कि नैतिक होना परम आवश्यक है। वो विश्व कल्याण की बात कहते थे, वास्तव में विश्व संत थे।
संगोष्ठी की शुरूआत तेरापंथ कन्या मंडल, गंगाशहर द्वारा मंगलाचरण का संगान के साथ हुई। मुनिवृन्दों द्वारा उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को जप करवाया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डाॅ. मेघना शर्मा का सुधा भूरा, मधु छाजेड़, संतोष बोथरा, मंजु आंचलिया एवं सुमन छाजेड़ ने स्मृति चिन्ह, जैन पताका व साहित्य भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि महापौर सुशीला कंवर को स्मृति चिंह, साहित्य, पताका भेंट कर शुभकरण सामसुखा, अमरचन्द सोनी, जीवराज सामसुखा व पवन छाजेड़ ने अभिनंदन किया। उपमहापौर राजेन्द्र पंवार को स्मृति चिंह, साहित्य एवं पताका भेंट कर जतन संचेती, जसकरण छाजेड़, रतनलाल छाजेड़, मनोहर नाहटा ने अभिनंदन किया। समारोह में उपस्थित पार्षद भवंरलाल साहू, बजंरग शोकल, शिवरतन पड़िहार, सुशील सुथार, रामदयाल पंचारिया, कुलदीप कडेला, सुमन छाजेड़, मंजु देवी सोनी, राजेश कच्छावा को पताका पहनाकर व स्मृतिचिंह भेंटकर तेरापंथी सभा, युवक परिषद, महिला मंडल व कन्यामंडल के कार्यकर्ताओं ने सम्मान किया।
कार्यक्रम का संचालन पार्षद सुमन छाजेड़ ने किया। पार्षदों का परिचय मानमल सोनी ने करवाया। मोहनी देवी सोनी ने भी विचार रखे। मुनिश्री श्रेयांसकुमार जी ने गीतिका का संगान किया। संगोष्ठी के अधिक जानकारी व फोटो के लिए http://acharyatulsishantipratisthan.com/view-gallery.php?id=15 लिंक पर क्लिक करें।