महाप्रज्ञ का काव्य पाठ

आचार्य महाप्रज्ञ ने अपनी प्रज्ञा व ज्ञान से विश्व को आलौकित किया: डॉ. व्यास

आचार्य महाप्रज्ञ ने अपनी प्रज्ञा व ज्ञान से विश्व को आलौकित किया: डॉ. व्यास
आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर ‘आचार्यश्री महाप्रज्ञ का काव्य पाठ’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित
गंगाशहर। आचार्य महाप्रज्ञ एक संत, योगी, आध्यात्मिक दार्शनिक लेखक, वक्ता के साथ कवि भी थे। यह बात डॉ. मेघना व्यास ने आचार्य तुलसी की मासिक पुण्यतिथि पर नैतिकता का शक्तिपीठ पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ ने अपनी प्रज्ञा व ज्ञान से विश्व को आलौकित किया, वो आचार्य तुलसी के अद्वितीय शिष्य थे। काव्य के क्षेत्र में भी उन्होंने किसी विषय को अछूता नहीं छोड़ा। डॉ. मेघना व्यास ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ ने ‘ऋषभायण’ महाकाव्य की रचना की तथा इनकी कृति ‘सम्बोधि’ को समाज ‘गीता’ के समकक्ष पवित्र ग्रंथ मानता है। उन्होंने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ शाक्ति सम्पन्न, कवित्व और उनका ‘रत्नमालरचितम’ खण्डकाव्य मेरे लिए जिज्ञासा का केन्द्र बिन्दु रहा, इसलिए मैंने इसी विषय पर पीएच.डी करने का निर्णय लिया और मुझे सफलता प्राप्त हुई।
समारोह को सान्निध्य प्रदान कर रहे शासनश्री मणिलाल जी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ आशु कवि थे, वो संस्कृत, प्राकृत व हिन्दी में काव्य करते थे। उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाते हुए स्वरचित काव्यपाठ भी किया। मुनिश्री ने ‘बंजर भू में अमृत की धार लेकर आये, पतझर में बसंत की बहार लेकर आये’ कविता सुनाते हुए आचार्यश्री महाप्रज्ञ के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
मुनिश्री कुशलकुमार जी ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु से लेकर सभी आचार्य काव्य रचना करते रहे हैं। आचार्य भिक्षु की काव्य रचना उच्च कोटी की थी उन्होंने ‘भिक्षु ग्रंथ रत्नाकर’ की चर्चा करते हुए कहा कि आचार्य भिक्षु के काव्य को अवश्य पढें़ इससे आत्मा को निखारने एवं समझने का अवसर मिलेगा।
संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे तथा कवि हृदय थे। उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष में किए जा रहे कार्यों की चर्चा की। उन्होंने स्वागत भाषण करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. मेघना व्यास एवं मुनिवृन्दों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। सुश्री प्रियंका छाजेड़ ने मंगलाचरण किया। मुनिश्री कुशलकुमार जी ने जप करवाया।
श्रीमती रेखा चोरडि़या ने अपनी स्वरचित कविता ‘हे योगीराज, हे धर्माधिराज, कैसे तेरी महिमा गाऊं’ का पाठ किया। आभार ज्ञापन तेयुप अध्यक्ष पवन छाजेड़ ने किया। संचालन प्रेम बोथरा ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ. मेघना व्यास का सम्मान अमरचन्द सोनी, श्रीमती संतोष बोथरा, पीयूष लुणिया ने जैन पताका पहनाकर साहित्य भेंट करके एवं स्मृति चिन्ह प्रदान करके किया। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत होने पर पीयूष लूणिया एवं अभातेमम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत होने पर श्रीमती संतोष बोथरा का अभिनन्दन किया गया। सुश्री प्रियंका छाजेड़ का अखिल भारतीय स्तर की ‘स्वर संगम’ गायन प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर सम्मान किया गया।
आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के कर्मचारी बंशीलाल सेवग को श्रेष्ठ कर्मचारी के रूप में सम्मानित किया गया। उन्हें बसंत नौलखा, मनोहर नाहटा एवं अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने पताका, स्मृति चिन्ह एवं नगद राशि भेंट कर सम्मानित किया। छाजेड़ ने कहा कि बहुत ही मृदु भाषी एवं कर्त्तव्य परायण कार्यकर्ता है। कर्मचारियों के व्यवहार एवं कुशलता से संस्थानों की साख में अभीवृद्धि होती है।

प्रेषक
जैन लूणकरण छाजेड़
अध्यक्ष