106वां जन्मोत्सव

आचार्य तुलसी के 106वें जन्म दिवस पर ‘भजन संध्या’ का आयोजन

आचार्य तुलसी के 106वें जन्म दिवस पर ‘भजन संध्या’ का आयोजन
गंगाशहर। आचार्य तुलसी के 106वें जन्म दिवस के अवसर पर आचार्य तुलसी शान्ति प्रतिष्ठान के द्वारा गंगाशहर स्थित नैतिकता का शक्तिपीठ पर शासनश्री मुनिश्री मणिलाल जी के सान्निध्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया। मुनिश्री ने आचार्य तुलसी की माता वदना जी की स्तुति करते हुए कहा सभी लोग आज आचार्य तुलसी को याद कर रहे हैं लेकिन मैं उनकी मां वदना जी को याद कर रहा हूं। 20 अक्टूबर, 1914 कार्तिक बदी 02 के दिन उनकी कुक्षी से गुरुदेव तुलसी का जन्म हुआ। उन्होंने मां मरुदेवा व त्रिशला से तुलना करते हुए आगे कहा शुभ संस्कार देकर बालक तुलसी को संघ सेवा के लिए समर्पित कर दिया। ये उनका महान त्याग था। मुनिश्री ने कहा कि मां वदना के संस्कारों का परिणाम कहना चाहिए कि गुरुदेव तुलसी आगे चलकर तेरापंथ ही नहीं अपितु जैन शासन के महान् आचार्य बने। तेयुप अध्यक्ष पवन छाजेड़ ने आचार्य तुलसी के जीवन प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरुदेव ने अपना पूरा जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। नैतिकता एवं नशा मुक्ति व मानवीय एकता के लिए पूरे देश में पग-पग पैदल चलकर अलख जगाई। कार्यक्रम में कोमल एकता पुगलिया ने ‘चंदेरी चांद चरणा शिश झुकावा’ मधुर स्वरों में सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायक कलाकार भंवरलाल डाकलिया ने ‘हर दिल की धड़कन में प्रति पल तुलसी बसते’ का शानदान संगान किया। राजेन्द्र बोथरा ने ‘कभी दूर नजर आए कभी पास नजर आए’ भजन का संगान कर शमां बांधा।  कार्यक्रम के दौरान गायक कलाकार प्रियंका छाजेड़, धीरज रांका, चैनरूप तातेड़, मनोज छाजेड़, सुशीला देवी ललवाणी, प्रिया पारख व रामचन्द आंचलिया आदि ने भी मधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम के दौरान गायक कलाकारों का आसकरण पारख, अमरचन्द सोनी, पवन छाजेड़, अनिल सेठिया व संजू लालाणी ने स्मृति चिंह भेंट देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अन्त में जतन संचेती ने उपस्थित गणमान्यजनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन रोहित बैद ने किया।

प्रेषक
कन्हैयालाल रामपुरिया
व्यवस्थापक